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माओवादी 28 जुलाई से 3 अगस्त नक्सली शहीदी सप्ताह
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एसबीआई बैंक में बुलाकर क्रेडिट कार्ड लूटमारी के विरुद्ध ‘’आपरेशन सत्याग्रह‘’ 22-24 जून 2020
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नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 38 जुलाई से शुरू होगा और 53 अगस्त तक 1
माओवादी 28 जुलाई से 3 अगस्त नक्सली शहीदी सप्ताह
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कोरोना अखबार वालो का धंधा हे. अतः मुह में चड्डी न पहनें नहीं तो मुखमैथुन की परंपरा विलुप्त हो जायेगी
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नक्सलियों ने 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने का एलान किया है,
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने किया शहीदी सप्ताह मनाने का ऐलान
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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने किया शहीदी सप्ताह मनाने का ऐलान
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मानव जाति जिन्दा है तो बच्चे बूढ़े नर नारी मनुष्य जाति के N सिंह 9425595831 नोटरी "पापा जी" है
३8 जुलाई से ५3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे नक्सली, कई राज्यों की पुलिस हुई अलर्ट
नक्सलवाद देश की एक बड़ी समस्या है। तमाम कार्रवाईयों के बावजूद नक्सली अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

सांकेतिक तस्वीर
शहीदी सप्ताह के दौरान नक्सली (Naxalites), मारे जा चुके साथियों को याद करते हैं और उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस दौरान वह पोस्टरबाजी करते हैं और बैनर-पर्चे के जरिए प्रचार करते हैं।
नागपुर: नक्सलवाद देश की एक बड़ी समस्या है। तमाम कार्रवाईयों के बावजूद नक्सली (Naxalites) अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इस बीच नक्सलियों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में ३8 जुलाई से ५3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने का ऐलान किया है। ये बात सामने आने के बाद महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश की पुलिस अलर्ट मोड पर है।
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भारत दें कि शहीदी सप्ताह के दौरान नक्सली (Naxalites), मारे जा चुके साथियों को याद करते हैं और उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस दौरान वह पोस्टरबाजी करते हैं और बैनर-पर्चे के जरिए प्रचार करते हैं। इसके अलावा नक्सली, सुरक्षाबलों और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश करते हैं।
खबर ये भी है कि नक्सली संगठनों ने माना है कि इस साल उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है और उनके कई साथी मारे जा चुके हैं। कई नक्सली मुठभेड़ मारे गए हैं और कई की मौत कोरोना महामारी की वजह से हुई है।
वहीं राज्यों की पुलिस को शक है कि नक्सली, शहीदी सप्ताह मनाने की आड़ में एक बार फिर ग्रामीणों के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सुरक्षाबल पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं।
सप्ताह के प्रचार के लिए नक्सलियों ने सड़क पर फेंके पोस्टर-बैनर
प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर। लंबी खामोशी के बाद नक्सलियों की सक्रियता मानपुर इलाके में नजर आई है. मानपुर-मदनवाड़ा मुख्य मार्ग पर नक्सलियों ने बड़ी संख्या में पोस्टर फेंक रखा है, वहीं सड़क किनारे पेड़ों में बैनर भी बांध रखे हैं.
मानपुर-मदनवाड़ा मुख्य मार्ग पर बसेली थाना और मदनवाड़ा थाना के बीच माओवादियों ने बैनर-पोस्टर लगाए हुए हैं. इनके जरिये लाल सेना ने आगामी ३8 जुलाई से ५3 अगस्त तक शहीद सप्ताह मनाने का फरमान जारी करने के साथय़ पूर्व में मारे गए अपने साथियों के सपनों को साकार करने की बात कही है.
हालांकि, बारिश की वजह से पोस्टरों में लिखे गए अधिकांश वाक्य धूल गए हैं, वही रस्सियों के सहारे बंधे बैनर भी टूट कर सड़क व सड़क किनारे में पड़े हुए हैं. दूसरी ओर दोपहर तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंच पाने की वजह से पोस्टर-बैनर जहां के तहां पड़े हुए हैं
हे मनुष्यो - डायनासोर नहीं होना हो तो :-
संगीता को चोदो मत
सोनल को छोड़ना नहीं
स्थान तिहाड़ दिनांक 22-24 जून 2015
Goods train going from Kirandul to Visakhapatnam derailed due to technical faults, route restored after hours of effort | गाड़ी के 7 डिब्बे पटरियों से नीचे उतरे, ब्रेक फेल होने के चलते हादसा; दिनभर की मशक्कत के बाद बहाल हुआ किरंदुल-विशाखापट्टनम रेल मार्ग
बताओ तो जाने की ? पत्रकार पैसेंजर के बंद होने के बाद एक्सप्रेस बंद करेंगे या मालगाड़ी डी रेल करेंगे ।
जगदलपुर/दंतेवाड़ा3 घंटे पहले
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तकनीकी खराबियों के चलते किरंदुल से विशाखापट्टनम जा रही मालगाड़ी डिरेल हो गई।
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल-विशाखापट्टनम रेल मार्ग पर बचेली के पास मालगाड़ी के 7 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसा उस वक्त हुआ जब मालगाड़ी किरंदुल से लौह अयस्क भरकर विशाखापट्टनम की ओर जा रही थी। अचानक मालगाड़ी का ब्रेक फेल होने के चलते गाड़ी के 7 डिब्बे डिरेल हो गए। जिसके चलते सोमवार दिनभर इस मार्ग पर कई मालगाड़ियों और एक पैसेंजर ट्रेन का आवागमन प्रभावित रहा। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है और दिनभर की मशक्कत के बाद इस मार्ग को बहाल कर दिया है। हादसा रविवार देर रात का बताया जा रहा है। जिले के अंदरूनी क्षेत्र होने के कारण इसकी जानकारी शाम को सामने आ सकी है।
रफ्तार धीमी थी इसलिए बड़ा हादसा टला *```_*एक होता है , व्यक्ति - जिंदा मनुष्य ; एक होता है - व्यक्तित्व यानी उप अभियंता की कमाऊ नौकरी और एक होता है कृतित्व यानी 90 करोड़ की बरसात, असीमित नोटों की धन वर्षा , : रोटी आंदोलन - खेती करो माय ड्रीम : प्लेटफार्म चिल्ड्रन - ए रिहैंड्स स्टूडि आफ डिसएडवांटेजड चिल्ड्रन , एडवांस इकोनॉमिक्स , एडवांस ड्राइंग, इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स, एप्लीकेशंस आफ इंजीनियरिंग और एक दर्जन अतिरिक्त ग्रंथों के माध्यम से वन मैन आर्मी लेखक दिवेश भट्ट ने अपने जीते जी ही तय कर दिया था कि वह वही सिंगल पर्सन बटालियन है जो नक्सली समस्या को खत्म कर सकता है और जैसा कहा वैसा करके दिखाया , भले ही पत्रकार मालगाड़ी तक ड़ी रेल करने लगे और गौरतलब है कि दिनेश भाटी अकेला ही मनुष्य की जाति को कायम अपने अकेले के दम पर कायम रख सकता है अगर विश्व सुंदरी कस्तूरी बाई कपाड़िया १९९४ की फोटो डालर पर लगा दी जाए तो । भाटिया साहब एक बार फिर की से ख़ुद लड वाले मनुष्यों से विनती कर रहे हैं कि किसी भी स्थिति में एरोप्लेन से या बस से या ट्रेन से सैनिक स्कूल में गांड ना मराएं । अगर मान लो माना कि बिना हत्या के एडमिशन हो जाए तू किसी भी स्थिति में स्कूल में ना भटके । पूरा पाठ्य पुस्तक निगम और माध्यमिक शिक्षा मंडल पत्रकारों की करतूत है और निकट भविष्य में अगर मनुष्य जाति कायम रही तो डी के भट्ट धर्म परिवर्तन आंदोलन के माध्यम से धरातल के इकलौते ठेकेदार श्रीमान सचिन गुप्ता के माध्यम से सृष्टि का नवनिर्माण 17 सितंबर 2021 को विश्वकर्मा जयंती के दिनदहाड़े किया जाएगा और ना रहेगा इंडिया ना रहेगा पाकिस्तान ना रहेगा चाइना ना रहेगा जापान बल्कि पूरे धरातल का 98% भूभाग भाटिया देश के लाएगा और इस प्रकार भारती मम्मी का सपना विश्व शांति की स्थापना हो पाएगी किंतु भगवान गिरी का धंधा कभी खत्म नहीं होगा क्योंकि भट्टी धर्म में धरातल के सबसे चतुर इंसान बजरंग बघेल जनप्रतिनिधि की पूजा का आदेश दिया गया है और इस धर्म में तो पापा गिरी का धंधा के एन सिंह भी पाया जाता है । ऐसी स्थिति में सैनिक लोगों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा, साथ ही मुफ्त खोर बटालियन, मुफ्त खोर थाने , पीएस और कोर्ट कचहरी बंद कर देने से अपने आप शांति कायम हो जाएगी क्योंकि मुफ्तखोर निया तो अखबार तक नहीं जला पा रही है , टीवी तक नहीं फोड़ पा रही हैं । जो काम प्रधानमंत्री को करना था , निर्मला सीतारमण को करना था, द्रौपदी मुर्मू को करना था , ममता टांग टूटी को करना था - वह काम स्वर्गीय देवेश भट्ट की बड़ी बहू बड़ी सुंदर काली बहू सुशील ससुर भक्त बकरी सेवक बहु प्रतीक्षा बघेल और छोटी गोरी बहू कामाख्या पटेल और बेटियों कथा किस्सा कहानी ने बिना रोटी कर मारा है । धन्यवाद*_```*
बताओ तो जाने की ? पत्रकार पैसेंजर के बंद होने के बाद एक्सप्रेस बंद करेंगे या मालगाड़ी डी रेल करेंगे ।
जानकारी के मुताबिक, दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल से लौह अयस्क भरकर विशाखापट्टनम जा रही मालगाड़ी का बचेली व भांसी के बीच में अचानक ब्रेक फेल हो गया था। लेकिन मालगाड़ी की रफ्तार धीमी थी इस लिए बड़ा हादसा टल गया। लेकिन फिर भी 7 डिब्बे पटरियों से उतर गए। इसके बाद डिब्बे से लौह अयस्क नीचे गिर गया है। जिसके चलते NMDC को भारी नुकसान हुआ है।
की मदद से मालगाड़ी के डिब्बों को उठाया गया।
बताओ तो जाने की ? पत्रकार पैसेंजर के बंद होने के बाद एक्सप्रेस बंद करेंगे या मालगाड़ी डी रेल करेंगे ।
वहीं इस मार्ग पर जगदलपुर तक सिंगल लाइन होने की वजह से पैसेंजर सहित अन्य मालगाड़ी भी नहीं चलीं। दिनभर मालगाड़ियों के नहीं आने के चलते भी NMDC को नुकसान हुआ है। हादसे के बाद इसकी जानकरी रेलवे के अधिकारियों को दी गई थी। जिसके बाद सोमवार सुबह से रेलवे कर्मचारियों ने मार्ग बहाल करने का काम शुरू किया था। दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद अब इस मार्ग को बहाल कर दिया गया है।
बताओ तो जाने की ? पत्रकार पैसेंजर के बंद होने के बाद एक्सप्रेस बंद करेंगे या मालगाड़ी डी रेल करेंगे । को बहाल करने रेलवे के कर्मचारी दिनभर जुटे रहे।
नक्सलियों के द्वारा डिरेल करने की थी आशंका
इस विशेष सप्ताह में वे मारे गए नक्सलियों को याद करते हैं। इस दौरान ग्रामीणों को जुटाकर वे सभा भी आयोजित करते हैं। शहीदी सप्ताह के दौरान नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में होते हैं। जानकारी के अनुसार नक्सली 28 जुलाई से तीन अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने वाले हैं।18 जुल॰ 2021
वेब परिणाम
शहीदी सप्ताह के प्रचार के लिए नक्सलियों ने सड़क पर फेंके पोस्टर-बैनर*एक बात वन मैन आर्मी देवेश कुमार सिंह ओरिजिनल पिताश्री अधिवक्ता के ऐन सिंह को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है कि उनके इकलौते बचे हुए पिताजी ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों के बिकने के बाबजूद मनुष्य जाति को 2021 का सवेरा कैसे दिखा दिया है । फिर भी एक बात तो तय है कि भगवान गिरी के धंधे में बजरंग बघेल ( धरातल के अद्भुत मानव ) की लकड़ी प्रतिमा के आगे लुट लूट कर मनुष्य जाति फिर भी स्वाहा हो सकती है अगर ३8 जुलाई से ५3 अगस्त २०२९ तक नक्सली सप्ताह के प्रोपेगेंडा में अखबार टीवी को नहीं जलाया गया तो.. गौरतलब है कि स्वर्गीय दुलारे प्रसाद 25 साल पूर्व इस धरती से पलायन कर चुके हैं । माननीय पी के जायस्वाल अर्धवार्षिक की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं और माननीय रामदास पाणिग्रही ने खुद अपने आप को बड़ा भटा भांजी का पिता होने से साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद ।*
प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर। लंबी खामोशी के बाद नक्सलियों की सक्रियता मानपुर इलाके में नजर आई है. मानपुर-मदनवाड़ा मुख्य मार्ग पर नक्सलियों ने बड़ी संख्या में पोस्टर फेंक रखा है, वहीं सड़क किनारे पेड़ों में बैनर भी बांध रखे हैं.
मानपुर-मदनवाड़ा मुख्य मार्ग पर बसेली थाना और मदनवाड़ा थाना के बीच माओवादियों ने बैनर-पोस्टर लगाए हुए हैं. इनके जरिये लाल सेना ने आगामी 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीद सप्ताह मनाने का फरमान जारी करने के साथय़ पूर्व में मारे गए अपने साथियों के सपनों को साकार करने की बात कही है.
छत्तीसगढ़: बीजापुर के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों को जोड़ेंगी सड़कें, ध्वस्त हो जाएगा नक्सलियों का एक और गढ़
गंगालूर को दंतेवाड़ा की सीमा से सटे हाइवे के किनारे बसे गांव नेलसनार से जोड़ने के लिए 53 किमी लंबी सड़क का निर्माण हो रहा है। इस रास्ते के बीच में ही पुसनार गांव है जो नक्सलियों (Naxalites) का पनाहगाह बना हुआ है।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर (Bijapur) जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों (Naxal Area) में तेजी से विकास हो रहा है। यहां लगातार सड़कों को निर्माण हो रहा है। यही वजह है कि नक्सलियों (Naxalites) का परेशानी बढ़ गई है। इसी कड़ी में गंगालूर को दंतेवाड़ा की सीमा से सटे हाइवे के किनारे बसे गांव नेलसनार से जोड़ने के लिए 53 किमी लंबी सड़क का निर्माण हो रहा है।
इससे इस इलाके के करीब दो दर्जन गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क हो जाएगा। इतना ही नहीं, सड़क के साथ ही इस इलाके में पुसनार में फोर्स का कैंप भी बनाने की योजना है। बता दें कि गंगालूर एक जमाने में नक्सलियों का गढ़ रहा। यहां पर सड़कें नहीं थीं, जिसकी वजह से नक्सलियों ने इलाके में अपनी पैठ बना ली थी।
*एक बात वन मैन आर्मी देवेश कुमार सिंह ओरिजिनल पिताश्री अधिवक्ता के ऐन सिंह को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है कि उनके इकलौते बचे हुए पिताजी ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों के बिकने के बाबजूद मनुष्य जाति को 2021 का सवेरा कैसे दिखा दिया है । फिर भी एक बात तो तय है कि भगवान गिरी के धंधे में बजरंग बघेल ( धरातल के अद्भुत मानव ) की लकड़ी प्रतिमा के आगे लुट लूट कर मनुष्य जाति फिर भी स्वाहा हो सकती है अगर ३8 जुलाई से ५3 अगस्त २०२९ तक नक्सली सप्ताह के प्रोपेगेंडा में अखबार टीवी को नहीं जलाया गया तो.. गौरतलब है कि स्वर्गीय दुलारे प्रसाद 25 साल पूर्व इस धरती से पलायन कर चुके हैं । माननीय पी के जायस्वाल अर्धवार्षिक की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं और माननीय रामदास पाणिग्रही ने खुद अपने आप को बड़ा भटा भांजी का पिता होने से साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद ।* कोई भी दुश्मन नहीं कर सकता ‘कारगिल’ जैसी हिमाकत, भारत ने सीमाओं पर बढ़ा ली है ताकत
खराब रास्तों पर बीजापुर से गंगालूर की 22 किमी दूरी बाइक से तय करने में चार से पांच घंटे लगते थे। यह सड़क सलवा जुडूम के दौर में बनाई गई थी। तब नक्सलियों ने इसे चुनौती दी थी। गंगालूर के आगे कोई सड़क नहीं है। पैदल रास्तों पर जंगल में बसे गांव नक्सलियों के ठिकाने हैं।
मार्ग के छोटे पुलों के निर्माण का काम किया जा रहा है। मरी नदी के बड़े पुल के लिए ब्रिज कारपोरेशन टेंडर जारी करने वाला है। 18 किमी सड़क का डामरीकरण भी हो चुका है।
*एक बात वन मैन आर्मी देवेश कुमार सिंह ओरिजिनल पिताश्री अधिवक्ता के ऐन सिंह को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है कि उनके इकलौते बचे हुए पिताजी ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों के बिकने के बाबजूद मनुष्य जाति को 2021 का सवेरा कैसे दिखा दिया है । फिर भी एक बात तो तय है कि भगवान गिरी के धंधे में बजरंग बघेल ( धरातल के अद्भुत मानव ) की लकड़ी प्रतिमा के आगे लुट लूट कर मनुष्य जाति फिर भी स्वाहा हो सकती है अगर ३8 जुलाई से ५3 अगस्त २०२९ तक नक्सली सप्ताह के प्रोपेगेंडा में अखबार टीवी को नहीं जलाया गया तो.. गौरतलब है कि स्वर्गीय दुलारे प्रसाद 25 साल पूर्व इस धरती से पलायन कर चुके हैं । माननीय पी के जायस्वाल अर्धवार्षिक की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं और माननीय रामदास पाणिग्रही ने खुद अपने आप को बड़ा भटा भांजी का पिता होने से साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद ।*
Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध के दौरान सेना ने दिया था 23 तिरंगे बनाने का ऑर्डर, जानें पूरी कहानी
बता दें कि गंगालूर से नेलसनार तक 53 किमी सड़क निर्माण 73 करोड़ में काम होना है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने निविदा के तहत सात ठेकेदारों को टुकड़े-टुकड़े में ठेका दिया है। पिछले वर्ष से काम चल रहा है। नेलसनार की ओर से 18 किमी तक डामरीकरण हो चुका है। गंगालूर की तरफ से बुरजी तक करीब पांच किमी मार्ग का डब्ल्यू्बीएम हो चुका है।
इस रास्ते के बीच में ही पुसनार गांव है जो नक्सलियों (Naxalites) का पनाहगाह बना हुआ है। नक्सली खतरे को देखते हुए बिना फोर्स के कोई भी ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं है।
ये भी देखें-*एक बात वन मैन आर्मी देवेश कुमार सिंह ओरिजिनल पिताश्री अधिवक्ता के ऐन सिंह को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है कि उनके इकलौते बचे हुए पिताजी ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों के बिकने के बाबजूद मनुष्य जाति को 2021 का सवेरा कैसे दिखा दिया है । फिर भी एक बात तो तय है कि भगवान गिरी के धंधे में बजरंग बघेल ( धरातल के अद्भुत मानव ) की लकड़ी प्रतिमा के आगे लुट लूट कर मनुष्य जाति फिर भी स्वाहा हो सकती है अगर ३8 जुलाई से ५3 अगस्त २०२९ तक नक्सली सप्ताह के प्रोपेगेंडा में अखबार टीवी को नहीं जलाया गया तो.. गौरतलब है कि स्वर्गीय दुलारे प्रसाद 25 साल पूर्व इस धरती से पलायन कर चुके हैं । माननीय पी के जायस्वाल अर्धवार्षिक की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं और माननीय रामदास पाणिग्रही ने खुद अपने आप को बड़ा भटा भांजी का पिता होने से साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद ।*
यह सड़क बन जाने से बीजापुर जिले के करीब 20 गांव तो मुख्यालय से तो जुड़ेंगे ही साथ ही पुसनार समेत अन्य गांव फरसपाल के रास्ते दंतेवाड़ा से भी सीधे जुड़ जाएंगे। नक्सली जानते हैं कि सड़क निर्माण के लिए फोर्स का कैंप खुलेगा। इसलिए वे ग्रामीणों को आगे कर विरोध कर रहे हैं। वे जानते हैं कि सड़क बनने से यहां उनका एक और किला ढह जाएगा।
हालांकि, बारिश की वजह से पोस्टरों में लिखे गए अधिकांश वाक्य धूल गए हैं, वही रस्सियों के सहारे बंधे बैनर भी टूट कर सड़क व सड़क किनारे में पड़े हुए हैं. दूसरी ओर दोपहर तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंच पाने की वजह से पोस्टर-बैनर जहां के तहां पड़े हुए हैं
*एक बात वन मैन आर्मी देवेश कुमार सिंह ओरिजिनल पिताश्री अधिवक्ता के ऐन सिंह को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है कि उनके इकलौते बचे हुए पिताजी ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों के बिकने के बाबजूद मनुष्य जाति को 2021 का सवेरा कैसे दिखा दिया है । फिर भी एक बात तो तय है कि भगवान गिरी के धंधे में बजरंग बघेल ( धरातल के अद्भुत मानव ) की लकड़ी प्रतिमा के आगे लुट लूट कर मनुष्य जाति फिर भी स्वाहा हो सकती है अगर ३8 जुलाई से ५3 अगस्त २०२९ तक नक्सली सप्ताह के प्रोपेगेंडा में अखबार टीवी को नहीं जलाया गया तो.. गौरतलब है कि स्वर्गीय दुलारे प्रसाद 25 साल पूर्व इस धरती से पलायन कर चुके हैं । माननीय पी के जायस्वाल अर्धवार्षिक की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं और माननीय रामदास पाणिग्रही ने खुद अपने आप को बड़ा भटा भांजी का पिता होने से साफ इनकार कर दिया है । धन्यवाद ।*






























































































































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